हिन्दी सीखें–लिङ्ग

शब्द का वह रूप जो पुरुष जाती अथवा स्त्री जाती होने की भिन्नता का आभास कराये, उसे लिङ्ग कहा जाता है।

जैसे पुरुष जाती के लिए राजा, छात्र, बैल, राम आदि प्रयुक्त होते हैं और स्त्री जाती के लिए रानी, छात्रा, गाय, सीता आदि प्रयुक्त होते हैं।

लिङ्ग के भेद (Kinds of Gender)

हिन्दी में लिङ्ग के दो रूप माने जाते हैं-

पुल्लिङ्ग (Masculine)- पुरुष जाती का बोध कराने वाले शब्द को पुल्लिङ्ग कहा जाता है।

जैसे- घोड़ा, मोर, चाचा, लड़का, हाथी, मुरगा, कुत्ता, बकरा, हिरन, ऊँट, चूहा, आदि।

स्त्रीलिङ्ग (Feminine)- स्त्री जाती का बोध कराने वाले शब्द को स्त्रीलिङ्ग कहा जाता है।

जैसे- घोड़ी, मोरनी, चाची, लड़की, हथिनी, मुरगी, कुतिया, बकरी, हिरनी, ऊँटनी, चुहिया आदि।

लिङ्ग की पहचान (Identifying Gender)

प्राणीवाचक शब्द- प्राणीवाचक शब्दों में कुछ शब्द सदा ही पुल्लिङ्ग होते हैं।

जैसे- कौआ, केंचुआ, चीता, चमगीदड़, बगुला, भेड़िया, तीतर, तोता, खटमल, पक्षी, मच्छर और उल्लू आदि।

प्राणीवाचक शब्दों में ही कुछ शब्द सदैव ही स्त्रीलिङ्ग भी होते हैं।

जैसे- कोयल, मैना, मक्खी, मछली, बटेर, बत्तख, तितली, जूँ, जोंक, चिड़िया और चील आदि।

शब्दों में लिङ्ग भेद करने के लिए उनसे पूर्व नर या मादा लिख कर भी किया जा सकता है।

जैसे- नर चील, नर तितली, नर मछली, मादा कोयल, मादा तीतर, मादा मच्छर आदि।

पुल्लिङ्ग शब्द— सदैव पुल्लिङ्ग रहने वाले शब्द निम्नलिखित होते हैं-

दिनों के नाम- सोमवार, मङ्गलवार, शनिवार, रविवार आदि।
महीनों के नाम- चैत्र, फागुन, आषाढ़, जनवरी, अप्रैल, नवंबर दिसंबर आदि।
ग्रहों के नाम- मङ्गल, चन्द्रमा, बुध, शनि, शुक्र और बृहस्पति आदि। इसमें पृथ्वी स्त्रीलिङ्ग शब्द है। यह अपवाद है।
सागरों के नाम- हिन्द महासागर, प्रशान्त महासागर, अरब सागर आदि।
पहाड़ों के नाम- नीलगिरि, हिमालय, आल्पस, विण्ध्याचल आदि।
देशों के नाम- भारत, फ्रांस, अमेरिका और पुर्तगाल आदि।
महाद्वीपों के नाम- एशिया, यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया आदि।
धातुओं के नाम- लोहा, सोना, ताँबा, पीतल, काँसा, जस्त आदि। इसमें चाँदी स्त्रीलिङ्ग शब्द है। यह अपवाद है।
खनिज पदार्थों के नाम- तेल, कोयला, मैंगनीज आदि।
रत्नों के नाम- मूँगा, मोती, हीरा, पन्ना, नीलम आदि।
वृक्षों के नाम- आड़ू, आम, अमरूद, संतरा, सेब, गुलाब, गेंदा, नींबू आदि। इसमें शीशम, लीची, इमली, मौलसिरी आदि स्त्रीलिङ्ग शब्द हैं। यह अपवाद है।
फसलों के नाम- बाजरा, चावल, चना, गेहूँ, जौ, गन्ना, लोबिया आदि। इसमें बरसीम, मक्का, मटर आदि स्त्रीलिङ्ग शब्द हैं। यह अपवाद है।
भोज्य पदार्थों के नाम- हलवा, समोसा, डोसा, पेड़ा, रसगुल्ला, भटूरा, अचार आदि। इसमें रोटी, पूरी, कचौड़ी, जलेबी, बरफी, दही, खीर, कढ़ी, मिठाई, चटनी, तरकारी आदि सब स्त्रीलिङ्ग शब्द हैं। यह अपवाद है।

स्त्रीलिङ्ग शब्द— सदैव स्त्रीलिंग रहने वाले शब्द निम्नलिखित होते हैं-

नदियों के नाम- कृष्णा, कावेरी, गङ्गा, यमुना, घाघरा, नर्मदा, तुङ्गभद्रा, ब्रह्मपुत्र आदि ।
झीलों के नाम- साँभर, डल, चिलका, वूलर आदि।
नक्षत्रों के नाम- भरणी, भद्रा, चित्रा, आर्द्रा आदि।
तिथियों के नाम- प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, पूर्णिमा, अमावस्या आदि।
भाषाओं के नाम- पञ्जाबी, हिन्दी, संस्कृत, अङ्ग्रेजी, उर्दू, फारसी, अरबी, रूसी, चीनी, पुर्तगाली, मलयालम आदि।
खेलों के नाम- हाकी, कबड्डी, कुश्ती, तैराकी, दौड़, क्रिकेट, वालीबाल, निशानेबाजी आदि।

हिन्दी सीखें–संज्ञा निर्माण (Building of Noun)

भाववाचक संज्ञा का निर्माण निम्नलिखित शब्दों से किया जा सकता है।

  • जातिवाचक संज्ञा से
  • सर्वनाम से
  • वीशेषण से
  • क्रिया से
  • क्रियाविशेषण से

जातिवाचक संज्ञा से—-

शब्द  भाववाचक संज्ञा
बच्चा बचपन
नारी नारीत्व
बाल बालपन
नेता नेतृत्व
बन्धु बन्धुत्व
लड़का लड़कपन
सेवक सेवा
अध्यापक अध्यापन
पुरुष पुरुषत्व
भिक्षुक भिक्षा
पशु पशुता
शिशु शैशव
पण्डित पाण्डित्य
युवा यौवन
मानव मानवता
मनुष्य मनुष्यता

सर्वनाम से—-

शब्द  भाववाचक संज्ञा
अहं अहंमन्यता
निज निजत्व
आप आपा
मम ममत्व/ममता
अपना अपनत्व
पराया परायापन

विशेषण से—-

शब्द  भाववाचक संज्ञा
जागरूक जागरूकता
दुखी दुःख
तत्पर तत्परता
मीठा मिठास
नीच नीचता
मृदु मृदुता
मधुर मधुरता
महान महानता
श्रेष्ठ श्रेष्ठता
विद्वान विद्वता
राष्ट्रीय राष्ट्रीयता
वीर वीरता
स्वतन्त्र स्वतन्त्रता
लघु लघुता
स्वस्थ स्वास्थ्य
लंबा लंबाई
सुन्दर सुन्दरता सौंदर्य
सुखी सुख
उदास उदासी
उदार उदारता
गंभीर गंभीरता
उज्जवल उज्जवलता
करुण करुणा
उत्सुक उत्सुकता
कटु कटुता
चौड़ा चौड़ाई
काला कालिमा
चालाक चालाकी
कोमल कोमलता
कायर कायरता

क्रिया से—-

शब्द  भाववाचक संज्ञा
उड़ना उड़ान
झुकना झुकाव
उलझना उलझाव
झुँझलाना झुँझलाहट
बनना बनावट
चुनना चुनाव
बहना बहाव
चमकना चमक
बुलाना बुलावा
चलना चाल
बिकना बिक्री
चढ़ाना चढ़ावा
बुनना बुनाई
भरना भराई
समझना समझ
कूदना कूद
सजना सजावट
कटना कटाव
सिलना सिलाई
कमाना कमाई
डाँटना डाँट
ढूँढ़ना ढूँढ़
पूजना पूजा
मिलना मिलाप
पढ़ना पढ़ाई
मारना मार
पड़ना पड़ाव
मोहना मोह
पकड़ना पकड़
धोना धुलाई
लूटना लूट
दिखाना दिखावट
लिखना लिखाई
दलना दलन

क्रियाविशेषण से—-

शब्द  भाववाचक संज्ञा
निकट निकटता
दूर दूरी
सहज सहजता
तेज तेजी
शीघ्र शीघ्रता

 

Difference between Krishna Paksha and Shukla Paksha

According to Hindu Panchang, every month has two Paksha of 15 days each. And hence first 15 days of every month (Paksha) are called Krishna Paksha and the following 15 days of the same month are called Shukla Paksha. The fifteenth day of Shukla Paksh is called Purnima or Punam.

हिन्दू-पाञ्चाङ्ग हर माह के 15-15 के दो भाग करता है। हर भाग को पक्ष कहा जाता है। पहले पक्ष को कृष्णपक्ष तथा दूसरे को शुक्लपक्ष कहा जाता है। दिनों का क्रम निम्नलिखित अनुसार है-

  • प्रतिपदा : पहला दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • दूज : दूसरा दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • तीज : तीसरा दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • चौथ : चौथा दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • पञ्चमी : पाञ्चवाँ दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • छठ : छठा दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • सप्तमी : सातवाँ दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • अष्टमी : आठवाँ दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • नवमी : नौवाँ दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • दशमी : दसवाँ दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • एकादशी : ग्यारहवाँ दिन: (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • द्वादशी : बारहवाँ दिन : (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • त्रयोदशी : तेरहवाँ दिन: (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • चतुर्दशी :चौदहवाँ दिन: (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • अमावस : पन्द्रहवाँ दिन: (कृष्णपक्ष या शुक्लपक्ष दोनों का)
  • पूर्णिमा या पूनम शुक्लपक्ष का पन्द्रहवाँ दिन या माह का अन्तिम दिन होता है।

For example January to December month has both Krishna Paksha and Shukla Paksha in each ending with Purnima.

हिन्दी सीखें–संज्ञा (Noun)

कोई भी वस्तु, प्राणी, गुण, दशा या भाव के नाम को ही हम संज्ञा कहते हैं।

जैसे— सिंह, लड़की, दीवार और घास आदि।

संज्ञा के तीन भेद निम्न लिखित हैं-

  • जातिवाचक संज्ञा
  • व्यक्तिवाचक संज्ञा
  • भाववाचक संज्ञा

जातिवाचक संज्ञा—जो शब्द एक ही प्रकार के सभी वस्तुओं या प्राणियों का बोध कराता हो उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।

जैसे—बकरी, पुस्तक, पङ्खा, लड़का आदि।

व्यक्तिवाचक संज्ञा—जो शब्द किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराता हो उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।

जैसे—महात्मा गाँधी, आगरा, गङ्गा आदि।

भाववाचक संज्ञा—जिन शब्दों से मन के द्वारा अनुभव किये जानेवाले भावों का बोध होता हो उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं।

इस संज्ञा को देखा या छुआ नहीं जा सकता बल्कि अनुभव किया जाता है।

जैसे—अवगुण, कोमलता, ठण्ड, बचपन आदि।

हिन्दी सीखें–समास (Compound Words)

समास— दो शब्दों के मेल से बने शब्द को समास कहते हैं।

जैसे – हिमकण का अर्थ है हिम के कण

समास-विग्रह—सभी पदों को अलग-अलग करने की विधि को समास-विग्रह कहा जाता है।

जैसे – पेटदर्द = पेट में दर्द

जीवन-स्वामी = जीवन का स्वामी

भेद — समास के छे (Six) भेद बताये जाते हैं ।

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. बहुब्रीहि समास
  6. द्ंवद्व समास

अव्ययीभाव समास – पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा हो तो समास होने पर दोनो पद अव्यय हो जाते हैं।

जैसे – प्रतिदिन, एकाएक आदि

तत्पुरुष समास – इसका पहला पद विशेषण का और दूसरा पद प्रधान होता है। इसमें सभी छह (Six) कारकों की विभक्तियों – को, से, के लिये, का, की, के, में पर, का लोप हो जाता है।

तत्पुरुष समास भी छह (Six) प्रकार का होता है-

  • कर्म तत्पुरुष—इसमें कर्म कारक के चिह्न को का लोप हो जाता है।

जैसे— गगन को चूमनेवाला – गगनचुंबी,

परलोक को जाना परलोकगमन

  • करण तत्पुरुष—इसमें करण कारक के चिह्न से, के द्वारा का लोप  हो जाता है।

जैसे— रस से युक्त – रसयुक्त,

गुण से हीन – गुणहीन

  • संप्रदान तत्पुरुष—इसमें संप्रदान कारक के चिह्न के लिए का लोप हो जाता है।

जैसे— देश के लिये भक्ति – देशभक्ति

प्रकाश के लिये किरण – प्रकाश-किरण

  • अपादान तत्पुरुष—इसमें अपादान कारक के चिह्न से का लोप हो जाता है।

जैसे—धर्म से विमुख – धर्मविमुख

देश से निकालना – देशनिकाला

  • संबन्ध तत्पुरुष—इसमें संबन्ध कारक के चिह्न का, के, की का लोप हो जाता है।

जैसे—माता का भक्त -  मातृभक्त

सेना का पति – सेनापति

  • अधिकरण तत्पुरूष—इसमें अधिकरण कारक के चिह्न में पर का लोप हो जाता है।

जैसे—अपने पर बीती हुई – आपबीती

रस में लीन – रसलीन

कर्मधारय समास – इसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है।

जैसे—नीलकमल, सगुण

द्विगु समास– इसमें पहला पद सङ्ख्यावाची और दूसरा संज्ञा का होता है।

जैसे– त्रिकोण, नवग्रह

बहुब्रीहि समास – इसके दोनों पदों में से कोई भी पद प्रधान नहीं होता, अपितु कोई अन्य ही होता है।

जैसे — चतुरानन – चार मुखवाला अर्थात् ब्रह्मा

दशानन – दस मुखवाला अर्थात् रावण

द्वंद्व समास – इसमें दोनों पदों में और शब्द का लोप हो जाता है।

जैसे—माता और पिता – माता-पिता

अन्न और जल – अन्न-जल

व्रत तथा उपवास में अन्तर

Differentiate between Vrat and Upvas

व्रत और उपवास में भी कोई भेद है कया-

व्रत–व्रत में भोजन का सेवन किया जा सकता है, यह मान्यता है।

उपवास—उपवास में पूर्ण रूप से निराहार रहना पड़ता है, कोई ढील नहीं है।

सातों वारों के नाम से प्रचलित व्रत—

सोमवार-व्रत—(अखण्डसौभाग्य, सन्तानप्राप्ति और निर्धनता दूर करने के लिए स्त्रियाँ व्रत करती हैं)

मङ्गलवार-व्रत—(वीर्ता, साहसप्राप्ति, शत्रुदमन और भविष्य के कष्ट निवारण के लिये)

बुधवार-व्रत—(तीनों गुण विद्या-बुद्धि-आरोग्यता और शान्ति के लिये)

बृहस्पतिवार/गुरुवार-व्रत—(मान-सम्मान के लिए, धन के लिये)

शुक्रवार-व्रत—(घर में शान्ति, मनोसिद्धि और पुत्र की लम्बी उम्र के लिये)

शनिवार-व्रत—(शनि की शान्ति हेतु, बाधायें दूर करने, ग्रहदशा ठीक करने के लिये)

रविवार-व्रत—(बल एवं मान-सम्मान प्राप्त करने के लिये)

I surrender my camera

Peeping through the viewfinder offering multiple focus points, I want to click a picture of yours.

I have tried it numerous times, but all the actualizations have some type of blemish. Sometimes, my focus is not sharp; sometimes, the alignment is not correct; sometimes, the image is dark due to wrong shutter speed.

Should I use flash to throw light on the one who is more radiant than thousands of suns?

Or do you feel I should open the aperture a bit more to let the light fall on the lens appropriately?

I always felt comfortable shooting but I am struggling now. I don’t know how but I feel confused and dazzled by so many options with which I can capture you.

I am inclined to stop manually adjusting my gear to get a good photo, and use the automatic mode.

It’s like I should surrender my camera to your will and let you operate it.

You are the manufacturer, O Lord!

You know what settings suit what conditions!

Tune it and let me have a clear vision of yours!

हिन्दी सीखें–विलोम शब्द (Antonyms)

किसी शब्द के उल्टे अर्थ का बोध कराने वाले शब्द को विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहा जाता है।

ध्यान रखें – यह आवश्यक है कि विलोम शब्द लिखते समय तत्सम शब्द के लिए तत्सम और तद्भव शब्द के लिए तद्भव शब्द का प्रयोग ही करें। यह आवश्यक नहीं के प्रत्येक शब्द का विलोम शब्द भी हो।

याद करने के लिए कुछ शब्दों के विलोम शब्द नीचे दिये जा रहे हैं -

शब्द विलोम शब्द विलोम
अमृत विष घृणा प्रेम
जीवन मृत्यु मोटा पतला
आदर निरादर गुप्त प्रकट
झूठ सच यश अपयश
अस्त उदय गुरू लघु
थोड़ा अधिक योगी भोगी
आस्तिक नास्तिक गुण दोष/अवगुण
निरक्षर साक्षर राग द्वेष
आदान प्रदान चर अचर
निद्रा जागरण रक्षक भक्षक
अन्त आदि चालाक सरल
निर्यात आयात लघु दीर्घ
आशा निराशा छोटा बड़ा
नीच ऊँच लाभ हानि
अच्छा बुरा जन्म मरण
निन्दा स्तुति लौकिक अलौकिक
अनाथ सनाथ जय/विजय पराजय
निर्दय सदय चल अचल
आकाश पाताल विस्तृत संक्षिप्त
पूर्व पश्चिम वीर कायर
अर्थ अनर्थ जड़ चेतन
पूरा अधूरा विधवा सधवा
अन्धकार प्रकाश जर अजर
प्राचीन नवीन संयोग वियोग
इधर उधर जीत हार
प्रतिकूल अनुकूल संग्रह त्याग
इच्छा अनिच्छा छाया धूप
पण्डित मूर्ख सरल कठिन
उपकार अपकार दानी कृपण
पुरस्कार दण्ड सम विषम
ऊँच नीच दरिद्र धनी
प्रलय सृष्टि सर्दी गर्मी
उत्थान पतन दिन रात
प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सत्य असत्य
उत्तर प्रश्न सार्थक निरर्थक
प्रेम घृणा दीर्घ ह्रस्व
उत्तम अधम सुख दुःख
पाप पुण्य दूषित स्वच्छ
उपस्थित अनुपस्थित सुलभ दुर्लभ
पेय अपेय देश विदेश
एकता अनेकता सुबह शाम
बन्धन मोक्ष तीव्र मन्द
एक अनेक सच्चा झूठा
बाहर भीतर सक्रिय निष्क्रिय
कृतज्ञ कृतध्न सामान्य विशिष्ट
बुराई भलाई साधारण असाधारण
कोमल कठोर स्वर्ग नरक
भीरू साहस स्थूल सूक्ष्म
भूत भविष्य स्वाधीन पराधीन
कड़वा मीठा स्वामी सेवक
भारी हल्का स्वतन्त्र परतन्त्र
कठिन सरल हित अहित
महँगा सस्ता हर्ष विषाद
कच्चा पक्का हिंसा अहिंसा
मुख्य गौण हाँ नहीं
कटु मधुर हँसना रोना
मानव दानव शाप आशीर्वाद
खरा खोटा शुद्ध अशुद्ध
ज्ञान अज्ञान ज्ञात अज्ञात

हिन्दी सीखें–तत्सम तथा तद्भव शब्द

तद्भव शब्द और उनके तत्सम रूपों की सूची

तत्सम तद्भव तत्सम तद्भव
अँधेरा अन्धकार पत्थर प्रस्तर
अचरज आश्चर्य पत्ता पत्र
अगम अगम्य नाक नासिका
अमोल अमूल्य प्यास पिपासा
आग अग्नि पंख पक्ष
आम आम्र बच्चा वत्स
आधा अर्ध पाँव पाद
ऊँचा उच्च ब्याह विवाह
काम कर्म बहू वधू
कीड़ा कीट भाप वाष्प
कबूतर कपोत बूँद बिन्दु
कुआँ कूप मक्खी मक्षिका
खेत क्षेत्र भीख भिक्षा
गधा गर्दभ मामा मातुल
गाँव ग्राम भाई भ्राता
घड़ा घट मुँह मुख
चाँद चन्द्र माथा मस्तक
घी घृत सीख शिक्षा
जीभ जिह्वा मीठा मिष्ट
छेद छिद्र सूखा शुष्क
दाँत दन्त रात रात्रि
दही दधि हिरन हरिण
दूध दुग्ध सच सत्य
दीया दीप हाथ हस्त
नया नव हाथी हस्ती
धुआँ धूम्र साँप सर्प

हिन्दी सीखें–शब्द समूह और एक शब्द (One Word Substitution)

भाषा में कथन को संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाने के लिए एक शब्द (One Word)  का प्रयोग किया जाता है। कुछ शब्द-समूहों के लिए एक शब्द नीचे दिए जा रहे हैं -

शब्द – समूह एक शब्द
जो पढ़ा न जा सके अपठनीय
जिस का कोई अन्त न हो अनन्त
जो कभी बूढ़ा न हो अजर
जिसका कोई न हो अनाथ
जिसका कोई आरम्भ न हो अनादि
जिसका विश्वास न किया जा सके अविश्वसनीय
जो कहा न जा सके अकथनीय
जिसकी कोई उपमा न दी जा सके अनुपम
जिसको जीता न जा सके अजेय
किसी नई वस्तु की खोज करने वाला अविष्कारक
जो आचरण न्याय के विरुद्ध हो अन्याय
थोड़ा जानने वाला अल्पज्ञ
जिससे जान-पहचान न हो अपरिचित
दोपहर बाद का समय अपराह्न
बड़ा भाई अग्रज
जो दिखाई न दे अदृश्य/अगोचर
ईश्वर में विश्वास करनेवाला आस्तिक
जो अवसर के अनुसार बदल जाता हो अवसरवादी
अण्डे से जन्म लेने वाला अण्डज
जिसकी कोई सीमा न हो असीम
छोटा भाई अनुज
जिसका कोई इलाज न हो असाध्य
सूर्योदय से पूर्व का समय उषा
जिस पर उपकार किया गया हो उपकृत
जिस भूमि में कुछ भी पैदा न होता हो ऊसर
दूसरों से जलने वाला ईर्ष्यालु
अपनी इच्छा से किया जाने वाला ऐच्छिक
इतिहास से संबन्धित ऐतिहासिक
उपकार को याद रखने वाला कृतज्ञ
उपकार को भूल जाने वाला कृतध्न
बहुत ऊँचा/आकाश को चूमने वाला गगनचुंबी
चुगली करने वाला चुगलखोर
जल में निवास करने वाले जीव-जन्तु जलचर
जो किसी का पक्ष न ले तटस्थ
दस वर्ष का समय दशक/दशाब्दी
दूर की सोचनेवाला दूरदर्शी
गोद लिया हुआ दत्तक
जो कठिनाई से प्राप्त हो दुर्लभ
जहाँ जाना कठिन हो दुर्गम
प्रतिदिन होनेवाला दैनिक
जो कठिनाई से समझ में आये दुर्बोध
किसी अनुचित बात के लिए हठ करना दुराग्रह
धर्म में लीन रहनेवाला धर्मात्मा
जिसके पास बहुत धन हो धनाढ्य
जिसमें ममता न हो निर्मम
आकाश में उड़नेवाला पक्षी नभचर
निन्दा करनेवाला निन्दक
जिसमें लज्जा न हो निर्लज्ज
जिसका ईश्वर में विश्वास न हो नास्तिक
जिसका कोई आकार न हो निराकार
जो उत्तर न दे सके निरुत्तर
जो मांस न खाता हो निरामिष
दूसरे का उपकार करने वाला परोपकारी
पति में आस्था रखने वाली स्त्री पतिव्रता
दोपहर से पहले का समय पूर्वाह्न
विदेश में रहने वाला प्रवासी
फल खाकर रहने वाला फलाहारी
मांसवाला भोजन मांसाहार
दोपहर का समय मध्याह्न
कम खर्च करने वाला मितव्ययी
मीठा बोलने वाला मृदुभाषी
जिसे कानों से सुनायी न दे बधिर
जिसके किसी अङ्ग में खराबी हो विकलाङ्ग
जिसकी पत्नी मर गई हो विधुर
वर्ष में होनेवाला वार्षिक
जिसका पति मर गया हो विधवा
अधिक बोलनेवाला वाचाल
लालच करनेवाला लालची
मांसरहित भोजन शाकाहार
शरण में आया हुआ शरणागत
सौ वर्ष का समय शताब्दी
शरण चाहनेवाला शरणार्थी
सभ्य पुरुषों का आचरण शिष्टाचार
सब कुछ जानने वाला सर्वज्ञ
सप्ताह में होने वाला साप्ताहिक
अच्छे आचरण वाला सदाचारी
साथ पढ़ने वाला सहपाठी
आसानी से प्राप्त होने वाला सुलभ
सगा भाई/बहन सहोदर
कठोर हृदय वाला निष्ठुर
ईश्वर में विश्वास न करने वाला नास्तिक
जिसके पास कोई हथियार न हो निहत्था
जिसकी आशा टूट चुकी हो हताश
हँसी उत्पन्न करने वाला हास्यास्पद
सूर्य निकलने का समय सूर्योदय
सूर्य छिपने का समय सूर्यास्त
जो स्वयं पर निर्भर हो स्वावलंबी