जीवन जाच
जीवन जीने की कला ही जाच है। इसमें सुख-दु:ख, जय-पराजय और लाभ-हानी समान चलते हैं। भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है- ‘सुखदु:खे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ’। वाल्मीकि रामायण में लिखा है- ‘दुर्लभं हि सदा सुखम्’। महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने लिखा है- तुलसी इस संसार में, सुख दु:ख दोनों होय। ज्ञानी काटे ज्ञान से, मूरख काटे रोय।। […]