A poem in Hindi
तुम मेरे नहीं हो सकते ये मैं जानता हूँ। मैं जानता हूँ तुम मेरे नहीं हो सकते। मगर क्या कभी काँटों ने फूलों की तरह नहीं खिलना चाहा? क्या कभी लहरों ने किनारों की तरह नहीं मिलना चाहा? क्या कभी आग को प्यास नहीं लगी या फिर मरने वाले को जीने की आस नहीं लगी? […]