नामकरन संस्कार

It is admitted that a disciplined (Sanskrit) she-baby is equal to ten best sons.

संस्कारों में शीलवती कन्या को दस श्रेष्ठ पुत्रों के समान माना जाता है।

दश पुत्र-समा कन्या यस्य शीलवती सुता ।।

Contrary to it, an indisciplined (Devoid of Sanskars) son becomes destroyer of dynasty.

संस्कार विहीन पुत्र भी कुल को नष्ट करने वाला हो सकता है।

जिमि कपूत के ऊपजे कुल सद्धर्म नसाहिं।

शिशु (कन्या या पुत्र) में श्रेष्ठ व्यक्त्तित्व का जागरण हो, इस लिये श्रेष्ठ नाम रखा जाता है। मनोविज्ञान इस तथ्य को मानता भी है। नाम की महिमा शिशु में उत्साहवर्धक, सौम्य एवं प्रेरणाप्रद होती है।

Science of psychology believes that naming babies is to evoke characteristics of righteousness, courageousness, peace and prosperity, growth and all-round development of body, mind and spirit befitting self, family, society and the nation.

1. गुणवाचक नाम रखने से शिशु में गुणों का प्रवाह और प्रसार होता है।

जैसेः- बालक का नामः- विजयकुमार, सत्यप्रकाश, वीरभूषण आदि।

बालिका का नामः- प्रभा, करूणा, प्रतिभा आदि।

2. महापुरषों के नाम भी शिशु के व्यक्त्तित्व को प्रभावित करते हैं।

जैसेः- बालक का नामः- सुभाष, रवीन्द्र, रामअवतार आदि।

बालिका का नामः- उर्मिला, गायत्री, सावित्री आदि।

3. प्राकृतिक विभूतियों के नाम प्राकृतिक गुणों को उदय करती हैं।

जैसेः- बालक का नामः- हेमन्त, रत्नाकर, चन्दन आदि।

बालिका का नामः- सरिता, सुषमा, उषा आदि।

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