संस्कृत भाषा

संस्कृत भाषा का मूल्य तो इसके पठन से ही ज्ञात हो सकता है। इसमें कोई आपत्ती नहीं कि संस्कृत भाषा अपना अस्तित्व् खोने के कगार पर है, परंतु जो कोई भी इस भाषा का ज्ञान रखता है वो इस बात को जानता है कि संस्कृत भाषा इतनी दुर्बल नहीं। ये अवश्य ही अपनी ख्याती पुनः प्राप्त कर लेगी।

कुछ तथ्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि संस्कृत समस्त भाषाओं की जननी है। फ्रांस की विश्व विख्यात पत्रिका फोरबस् में इस बात की पुष्टि 1976 के अंक में की गई थी। भारत की समस्त भाषाएँ पढ़ कर इस बात की अनुभूति होती है। इतना रस है इस भाषा में कि व्यक्ति इसे और पढ़ना चाहता है। ये बात मानने मेँ कोई आपत्ति नहीँ है कि इस काल मेँ इस भाषा की अति दुर्गति हो रही है और कोई भी इस भाषा का ज्ञान प्राप्त नहीँ करना चाहता।

वैज्ञानिक इस तथ्य को जानते हैं कि ये संपूर्ण भाषा-मापदंडो पर सफ्ल है और कम्पयूटर के प्रयोग हेतु उच्चतम् भाषा है। इस बात में कोई आश्चर्य नहीं कि भविष्य काल में संस्कृत अपने गौरव को पुनः प्राप्त कर लेगी। अस्तु!

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3 thoughts on “संस्कृत भाषा”

  1. Though there are thousands of examples about the use of concept of Sanskrit dictums in the modern world, but a few realize the importance of those. However, very recently i noticed one in my mind–it runs like:

    देव प्रीति, पाप भीति, संघ नीति ।।

    It literally means: Love of God, Fear of Sin, and Morality of the group. If we take the modern system of management and outline the needs of any workers, we would write: He should love his work, should never think to act against the interests of the organization, and should be capable of doing team work. How truly those ancient lines depict the modern need.

    1. Work is duty and duty is God–देव प्रीति
    2. Working against the interests of the organization for which you are working is sin–पाप भीति
    3. Maintaining morality and compatibility within the team is team-work–संघ नीति

    It has been proven time and again that ancient wisdom is the most prized one, and it caters to the needs of modern world. It also outlines the rules for the success in the present world, in a very poetic way!

  2. Satyameva Jayate
    No collection of moral stories will be complete without the mention of Satya Harishcandra. His story is well known and praised by everyone. Truth is the most fundamental moral to be learnt by everyone and it is alone enough to reach God. The following is a small incident showing the satyr vaak paripaalanam of Harishchandra:

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