Hindi Poem–अरी सखी

अरी सखी

कौन कहता है तू अबला है

 

तू तो लक्षमी है

जो रणचण्डी बनी।

 

तू तो सत्य से भी विचित्र कल्पना है

जो अन्तरिक्ष को छू गई।

 

तू तो विपत्ति की दलदल से ऊपर उठकर

नीरजा बन कर खिली।

 

अरी सखी

तू सबला है।

तू निर्भया है।

तू प्रबला है।

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